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पुराने वाहनों को ईवी में बदलने की योजना

दस साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल कारों को स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत अब सड़कों पर चलाना प्रतिबंधित हो गया है. ऐसे में कुछ लोग अपनी कारों को स्क्रैप करने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील करवा रहे हैं.

कार मालिकों के इस रुख को देखते हुए सरकार पुराने वाहनों को खत्म करने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने पर विचार कर रही है. इसके लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जा सकती है.

सरकार पुराने वाहनों को रेट्रो फिटिंग के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने पर विचार कर रही है. प्राइमस पार्टनर्स और यूरोपीय व्यापार और प्रौद्योगिकी केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, पुराने वाहनों को रेट्रोफिटिंग से इलेक्ट्रिक में बदलने पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि सहयोग और सार्वजनिक भागीदारी से इस समस्या को आसानी से हल भी किया जा सकता है.

रेट्रो फिटिंग से आप अपनी पुरानी कार को इलेक्ट्रिक कार में बदलकर आसानी से चला सकेंगे. हालांकि, इसके लिए आपको एक पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा. आपको पहले अपनी पुरानी कार का रजिस्ट्रेशन आरटीओ यानी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से रद्द करवाना होगा और फिर सरकार से मान्यता प्राप्त इलेक्ट्रिक किट निर्माता कंपनी से संपर्क कर कार को ईवी में बदलवाने के बाद फिर से इलेक्ट्रिक वाहन के तौर पर पंजीकृत करवाना होगा.

रेट्रो फिटिंग मौजूदा वाहनों को आधुनिक बनाने का एक बेहतर तरीका है. इससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी. रेट्रो फिटिंग एक अस्थायी समाधान से कहीं अधिक है. आंकड़ों के अनुसार, 2023 तक वैश्विक स्तर पर रेट्रोफिट वाहन बाजार 65.94 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है. इसमें 7.40 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर के साथ 2032 तक इसके 125.37 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को हटाने के लिए अभी तक भारत में वाहन स्क्रैपेज नीति लागू है, जिसमें पुराने वाहनों को स्क्रैप किया जाता है. यह नीति केवल वाहनों की उम्र ही नहीं बल्कि उनकी फिटनेस और उत्सर्जन स्तर सहित विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है. स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत पुराने वाहनों को हटाकर उनके स्थान पर नए और अधिक पर्यावरण-अनुकूल वाहनों को लाया जाता है.

 

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