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त्याग की भावना से प्रेरित है प्रधानमंत्री का अनुष्ठान मुर्मु

अयोध्या में सोमवार को होने जा रहे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रसन्नता व्यक्त की है. प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने देश की जनता को बधाई दी है और प्रधानमंत्री मोदी को सराहा है.

पत्र में राष्ट्रपति मुर्मु ने पीएम मोदी को बधाई देते हुए लिखा है कि अयोध्या में श्री राम जन्मस्थल पर मूर्ति की हो रही प्राण प्रतिष्ठा अत्यंत हर्ष का विषय है. इसके लिए आपका योगदान सराहनीय है. उन्होंने लिखा कि अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के उद्घाटन से जुड़े देशव्यापी उत्सवों के वातावरण में भारत की चिरंतन आत्मा की उन्मुक्त अभिव्यक्ति दिखाई देती है.

नए काल चक्र के शुभारंभ के साक्षी बन रहे मुर्मु ने कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम सब अपने राष्ट्र के पुनरुत्थान के एक नए काल चक्र के शुभारंभ के साक्षी बन रहे हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पत्र में प्रधानमंत्री द्वारा किए जा रहे अनुष्ठान को सराहा.

राष्ट्रपति ने लिखा कि आपके द्वारा किया गया 11 दिवसीय कठिन अनुष्ठान पवित्र धार्मिक पद्धतियों का अनुसरण मात्र नहीं है, बल्कि त्याग की भावना से प्रेरित सर्वोच्च आध्यात्मिक कृत्य है. आपका अनुष्ठान भगवान राम के प्रति संपूर्ण समर्पण का प्रतीक है.

राम हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भगवान राम द्वारा साहस, करुणा और अटूट कर्तव्यनिष्ठा जैसे जिन सर्वभौमिक मूल्यों की स्थापना की गई थी उन्हें इस भव्य मंदिर के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि श्री राम हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक हैं. वे बुराई के विरुद्ध निरंतर युद्धरत अच्छाई का आदर्श प्रस्तुत करते हैं. हमारे राष्ट्रीय इतिहास के अनेक अध्याय श्री राम के जीवन चरित्र और सिद्धांतों से प्रभावित रहे हैं. रामकथा के आदर्शों से ही राष्ट्र निर्माताओं को प्रेरणा मिली है.

पीएम की योजनाओं को सराहा

राष्ट्रपति मुर्मु ने पत्र में लिखा कि न्याय और जनकल्याण पर केंद्रित श्री राम की रीति का प्रभाव हमारे देश के शासन संबंधी वर्तमान दृष्टिकोण पर भी दिखाई देता है. इसका उदाहरण हाल ही में प्रधानमंत्री की ओर से अति पिछड़े जन जातीय समुदाय के लिए शुरू की गई पीएम जनमन पहल है. पीएम को लिखे पत्र को राष्ट्रपति ने सियावर राम चंद्र की जय से समाप्त किया.

 

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