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जनभागीदारी के साथ पारदर्शी व्यवस्था से गरीबी घटी मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से अपनाई गई पारदर्शी व्यवस्था और जनभागीदारी पर जोर देने से देश में गरीबी कम हुई है. इसी का नतीजा है कि बीते नौ साल में करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है.

विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी यह नहीं सोच सकता था कि भारत में गरीबी कम हो सकती है. गरीबों ने दिखाया है कि यदि उन्हें संसाधन दिए जाएं तो यह हो सकता है. गरीबी के आंकड़ों में आई गिरावट को दर्शाने वाली नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि भारत ने गरीबों की मदद करने के लिए अन्य देशों के सामने एक मॉडल पेश किया है. दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने कहा कि यह बहुत उत्साहजनक रिपोर्ट है.

बिना परेशानी लोगों को योजनाओं का लाभ मिले

पीएम ने कहा, बीते वर्षों में हमारा प्रयास रहा है कि वंचितों को वरीयता मिले, हर वह नागरिक जो अब तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा है, उसे जोड़ने की कोशिश की जा रही है. हमारा प्रयास ये है कि लोगों को बिना किसी परेशानी के योजनाओं का लाभ मिले, उनके दरवाजे पर मिले. विकसित भारत संकल्प यात्रा इसी सोच का विस्तार है.

अनुष्ठान के लिए कड़े नियमों का पालन

अयोध्या में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी कड़े नियमों का पालन कर रहे हैं. प्रधानमंत्री 11 दिन का अनुष्ठान कर रहे हैं. वह जमीन पर केवल कंबल बिछा कर सो रहे हैं और सिर्फ नारियल पानी ही पी रहे रहे हैं.

अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा होनी है और प्रधानमंत्री उसमें यजमान के रूप में शामिल होंगे. शास्त्रत्तें में देव प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा एक लंबी प्रक्रिया है. इसके लिए बहुत विस्तृत नियम बताए गए हैं. जिनका प्राण प्रतिष्ठा के कई दिन पहले से पालन करना होता है. एक रामभक्त के रूप में प्रधानमंत्री राममंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के प्रति एक आध्यात्मिक साधना के भाव से समर्पित हैं. उन्होंने तय किया कि अपनी तमाम व्यस्तताओं और जिम्मेदारियों के बावजूद वो प्राण प्रतिष्ठा के दिन और उसके पूर्व के सभी नियमों का दृढ़ता के साथ पालन करेंगे. इसके लिए मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व 11 दिवसीय यम-नियम पालन का अनुष्ठान शुरू किया है.

 

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