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मणिपुर के बाद नगालैंड पहुंची न्याय यात्रा

जुन्हेबोटो (नगालैंड) . राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ मंगलवार शाम को नगालैंड की राजधानी कोहिमा से जुन्हेबोटो पहुंची. रात्रि विश्राम के बाद राहुल गांधी बुधवार सुबह नई ऊर्जा से भरे नजर आ रहे थे. सफेद टी-शर्ट और कार्गो पैंट पहने राहुल ने सबसे पहले पार्टी के स्थानीय नेताओं से संक्षिप्त मुलाकात की. फिर उस बस पर सवार हो गए, जो उनकी यात्रा के लिए विशेषतौर पर बनाई गई है. नाम है ‘मोहब्बत की दुकान’. चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लिए राहुल चालक के बगल वाली सीट पर जम जाते हैं. उनकी सीट के सामने से आ रही कृत्रिम रोशनी में उनका चेहरा बाहर से साफ दिखाई पड़ रहा था.

राहुल के पोस्टरों से पटा रास्ता भारी-भरकम सुरक्षा बंदोबस्त के बीच ‘मोहब्बत की दुकान’ हॉर्न बजाते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ती है. ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की तरह इस बार उनके साथ लोगों का हुजूम नहीं था. बंदोबस्त से जुड़े लोगों के अलावा सेवादल के लोग उनके साथ थे. बस अब यात्रा मार्ग पर आ चुकी थी. रास्ता पूरी तरह राहुल के पोस्टरों से पटा था.

उधर, उनकी एक झलक पाने को बेताब लोग सड़क के दोनों ओर शांति से खड़े थे. बस जैसे ही उनके करीब से गुजरती है, एक शोर सा उठता है. समर्थक राहुल के समर्थन में नारेबाजी करने लगती है. वे उनसे मिलने को बेसब्र होने लगते हैं. लोगों का उत्साह देख राहुल खुद को रोक नहीं पाते. वे बस से उतरकर लोगों के बीच पहुंच जाते हैं और उनसे गर्मजोशी के साथ मिलते हैं.

दोनों यात्राओं में क्या है अंतर

भारत जोड़ो न्याय यात्रा भारत जोड़ो यात्रा

कोई संयोजक नहीं दिग्विजय सिंह थे संयोजक

30-35 लोग साथ चल रहे 100 से ज्यादा यात्री हमेशा शामिल रहे

विश्राम-भोजन के लिए 12 कंटेनर 60 कंटेनर का इस्तेमाल हुआ

राहुल ज्यादातर बस से कर रहे सफर अधिकतर समय पैदल की यात्रा

बस की छत से संबोधन

मोकोकचुंग में मौजूद समर्थक हाथ हिलाकर उनका स्वागत करते हैं. राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगने लगते हैं. लोग अपने नेता को देखने को मचल रहे थे. इतने में बस में लगी लिफ्ट के जरिए छत पर बने मंच पर अवतरित होते हैं. उनको देखकर शोर और तीव्र हो जाता है. वह बस की छत से सुबह 1030 बजे लोगों को संबोधित करते हैं. उनके संबोधन के साथ लोगों का शोर भी बढ़ जाता है. कुछ समय बाद रास्ते में एक चाय की दुकान में रुककर चाय पीते हैं और फोटो भी खिंचवाते हैं.

फुटबॉल मैच का आनंद

काफिला पहले से तय स्थान पर 1130 बजे रुकता है. राहुल गांधी बस से उतरकर वहां पहले से खड़ी दूसरी बस में चले जाते हैं. इसमें उनके दोपहर के खाने का बंदोबस्त था. 230 बजे राहुल फिर मोहब्बत की दुकान में सवार होते हैं. रास्ते में एक जगह उन्हें कुछ युवा फुटबॉल खेलते दिखते हैं. वे यहां रुककर मैच का आनंद लेते हैं. इसके बाद 430 बजे मेरानकॉन्ग पहुंचते हैं. अंधेरा होने के बाद काफिला मोकोकचुंग पहुंचता है. यहां रात्रि विश्राम करते हैं.

सेल्फी लेने और हाथ मिलाने के लिए होड़

अपने नेता को खुद के बीच पाकर हर कोई उनसे साथ हाथ मिलाने को बेताब हो उठता है. महिलाओं और युवाओं में उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ मच जाती है. राहुल मुस्कुराते हुए उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं. इस दौरान कोई उन्हें नगा शॉल तो कोई नगाओं का पारंपारिक हार भेंट करता है. लोगों के स्वागत से अभिभूत राहुल आगे बढ़ते रहते हैं. रास्ते में एक बच्चे को देख वह उसे गोद में उठा लेते हैं. उसके साथ फोटो भी खिंचवाते हैं. टॉफियों से भरी दोनों जेब से वह कुछ टॉफियां निकालकर उसके हाथों में रख देते हैं. यह देख दूसरे बच्चे भी उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं.

 

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