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गैर संगीन अपराध में बंद कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ होगा

गैर संगीन किस्म के अपराधों में बंद कैदियों की रिहाई का रास्ता नए कानून लागू होने के बाद साफ हो सकता है. देश की जेलों में बड़ी संख्या में ऐसे कैदी हैं, जिनका केस लंबे समय से लंबित है और उन्हें जेल में ही रखा गया है.
नए कानून में मामलों के निर्धारित समय सीमा में निपटारे की टाइम लाइन तय की गई है. निर्धारित अवधि में अगर जांच पूरी नहीं होती, चार्जशीट नहीं होती या फैसला नहीं होता है तो अपराध के आरोपी को अनावश्यक जेल में नहीं रखा जा सकेगा. अधिकारी ने बताया कि छोटे-मोटे अपराध में जेल में बंद लोगों की रिहाई के लिए भी कानूनी रास्ता नए अपराध संहिता कानून से खुल जाएगा. एक अधिकारी ने कहा कि अनुमान है कि नए कानूनों की अधिसूचना जारी होने के साथ ही कम गंभीर अपराधों के तहत जेल में बंद करीब 82 हजार कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
अंडर ट्रायल कैदियों की रिहाई प्रक्रिया शुरू करने के लिए विभिन्न स्तरों पर जागरूकता के लिए अभियान चलेगा. जिन कैदियों के पास जमानत के पैसे नहीं होंगे, उनके लिए सरकार ने विशेष फंड की व्यवस्था की है.
सूत्रों का कहना है कि देश की जेलों में साढ़े पांच लाख कैदी हैं. इन कैदियों की कुल संख्या में करीब आधे गैर संगीन अपराधों के कैदी हैं. अगर इनकी रिहाई संभव होती है तो जेलों का आधा बोझ कम हो जाएगा. इसके अतिरिक्त पहली बार और छोटा अपराध करने वाले लोगों के लिए कम्युनिटी सर्विस के इंतजाम से भी जेलों का भार कम होगा .
77 प्रतिशत कैदियों के केस अलग-अलग अदालतों में चल रहे
भारत की जेलों में सिर्फ 22 कैदी ही ऐसे हैं जिन्हें किसी अपराध में दोषी करार दिया गया है. इसके अलावा 77 कैदी ऐसे हैं जिनके केस अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं और इन पर फैसला नहीं आया है. यानी ये विचाराधीन कैदी हैं. खास बात यह है नॉर्थ-ईस्ट के ज्यादातर राज्यों में अंडरट्रायल कैदियों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है.
जमानत मिलते ही रिहा कर दिए जाएंगे
गैर संगीन अपराध के अंडर ट्रायल वालों की संख्या 2 लाख है. इनमें ज्यादातर तो अधिकतम सजा से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं. सूत्रों ने कहा, जमानत और रिहाई के लिए अंडर ट्रायल कैदियों को खुद अदालत नहीं जाना पड़ेगा. वे जेल से ही ऑनलाइन अदालत से रूबरू होंगे. जमानत मिलते ही रिहा कर दिए जाएंगे. सूत्रों का कहना है कि अभी तक जमानत के लिए पेशी और जमानत न मिलने पर फिर जेल ले जाने की प्रक्रिया में दिनभर पुलिस जवान लगे रहते थे. अब पुलिस बल को दूसरे काम करने का समय मिल सकेगा.

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