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इन देशों में नए साल की अजब-अनोखी मान्यताएं

प्राचीन काल में मिस्रवासी नया साल नाच, गाकर और पार्टी करके मनाते थे. यह उत्सव पूरे एक महीने चलता था. जापानी लोग नए साल पर घरों के दरवाजे पर रस्सा लटकाते हैं. उनकी मान्यता है कि इससे बुरी आत्माएं घर में प्रवेश नहीं करती हैं. वियतनाम के लोगों की मान्यता है कि भगवान हर घर में रहते हैं. नए साल के अवसर पर भगवान स्वर्ग की ओर प्रस्थान करते हैं. पारसी लोग नए साल से पूर्व थाली में गेहूं-जौ उगाते हैं. इसके पीछे उनकी मान्यता है कि बढ़ता हुआ पौधा नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है. रोम के लोगों का मानना है कि भगवान के दो सिर होते हैं. इन दोनाें सिरों से पुराने साल और नए साल नजर रखते हैं. नए साल का उत्सव प्राचीन काल से ही मनाया जा रहा है. इस उत्सव को बेबीलोन के लोग चार हजार वर्ष पूर्व फसल बुआई उत्सव के रूप में मनाते थे. रोमवासी नया साल मार्च में मनाते हैं. जनवरी का नाम रोमन देवता जेनस के नाम से पड़ा. यह पृथ्वी स्वर्ग, भूतकाल और भविष्यकाल के देवता माने जाते हैं.

सुखद भविष्य के लिए खाते हैं मेवे

उत्तरी भारत में नए साल पर पीले फूलों की माला पहनी जाती है, ऐसा इसलिए करते हैं कि वसंत आने वाला है. डचवासी नए साल पर सूखे मेवे खाना सुखद भविष्य का प्रतीक मानते हैं. दक्षिण-पूर्व एशिया में नववर्ष पर पक्षियों को उड़ाना और कछुओं को पानी में छोड़ना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. ब्रिटिश कोलम्बिया, कनाडा के लोग नववर्ष पर स्विमिंग सूट पहन कर बर्फ जैसे ठंडे पानी में छलांग लगाते हैं. स्कॉटलैंड के गांवों के लोग नए साल पर तारकोल के ड्रमों को गलियों में लुढ़काते हैं. उनका मानना है कि पुराना साल जलकर समाप्त हो गया और नया साल शुरू हो गया.

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