स्कूलों में शिक्षा के साथ संस्कार भी मिले: बृजमोहन अग्रवाल

0
10

आज के समय बच्चों में ज्यादा से ज्यादा नंबर लाने के लिए परिवार और समाज की तरफ से दबाव दिया जाता है. जिससे बच्चे मानसिक अवसाद तक में चले जाते हैं. जो बिल्कुल भी उचित नहीं है. स्कूलों और शिक्षकों का दायित्व है कि, बच्चों की छुपी प्रतिभा स्पोर्ट्स, डांस, सिंगिंग को भी निखारें. उन्होंने कहा कि अगर सचिन तेंदुलकर के माता-पिता ने भी उन पर ज्यादा नंबर लाने के लिए दबाव बनाया होता तो सचिन आज विश्व के महानतम क्रिकेटर नहीं बन पाते. उक्त बातें प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने शिवोम विद्यापीठ के वार्षिक उत्सव ‘शिवोम संस्कृति एनुअल कल्चरल फेस्ट 2023’ के दौरान कहीं.

अपने संबोधन में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पुराने जमाने में बच्चे आश्रम में रहते थे वहां जीवन जीने की कला सिखाते थे परंतु आज की शिक्षा पद्धति में संस्कारों का अभाव दिखता है जिसमे सुधार की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि स्कूल केवल मार्कशीट बांटने के केंद्र नहीं होने चाहिए बल्कि स्कूल संस्कार और संस्कृति के केंद्र होने चाहिए. स्कूलों में धर्म, अध्यात्म, संस्कार, संस्कृति, नैतिकता और अनुशासन पर भी जोर देना चाहिए. स्कूलों में पहले पीरियड योग और प्राणायाम का होना चाहिए. जिससे बच्चे पारिवारिक और सामाजिक दबाव से अपने आप को मुक्त रखना सीख सकेंगे.

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने कौशल और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया. विभिन्न भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस दौरान प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया. बृजमोहन अग्रवाल ने स्कूलों में किताबी शिक्षा के साथ ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और संस्कारिक ज्ञान देने पर जोर दिया.