हार के बाद कांग्रेस में विधायक दल का नेता चुनने पर तकरार

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नई दिल्ली. मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनावी हार के बाद कांग्रेस में विधायक दल का नेता चुनने को लेकर मशक्कत हो रही है.

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नेता चुनने को लेकर राज्यों में हुई बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित करके नेता चुनने का अधिकार आलाकमान को दे दिया गया है. इस बीच, मध्यप्रदेश में हुई बैठक में कमलनाथ की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

पार्टी की ओर से कहा गया है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की वजह से कमलनाथ बैठक में नहीं आए. सूत्रों का कहना है कि हार के बाद से कमलनाथ जिस तरह से पार्टी में एक धड़े के निशाने पर आए हैं उससे वे नाखुश हैं. प्रदेश अध्यक्ष पद से उनके इस्तीफे को लेकर भी तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश में पार्टी अब भविष्य के नेतृत्व के लिहाज से फैसला करना चाहती है. इसके साथ ही लोकसभा की चुनावी रणनीति का असर भी नेता के चुनाव में नजर आएगा.

कमलनाथ का प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहना भी मुश्किल है. छत्तीसगढ़ में भी हार के बाद से पार्टी में अलग-अलग खेमे आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. लिहाजा नेतृत्व के लिए यहां भी फैसला आसान नहीं होगा. भूपेश बघेल के कई नजदीकी नेताओं ने टी एस सिंह देव और प्रभारी शैलजा को लेकर आरोप लगाए हैं. जबकि दूसरा खेमा बघेल को निशाना बना रहा है. फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने दोनों जगहों पर प्रभारी और पर्यवेक्षकों के जरिए विधायकों और अन्य नेताओं की राय ली है.

कहा जा रहा है कि जल्द भावी रणनीति को ध्यान में रखकर फैसला कर लिया जाएगा. राजस्थान में भी पार्टी नई लीडरशिप के लिहाज से फैसला करना चाहती है, लेकिन सचिन पायलट को लेकर गहलोत का पेंच कितना असर दिखाएगा यह देखना होगा.