जम्मू-कश्मीर मसले पर विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने

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नई दिल्ली. राज्यसभा में सोमवार को जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक व जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप चला. विपक्षी दलों ने जहां जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा खत्म करने का विरोध किया, वहीं सत्तापक्ष ने तर्क दिया कि मौजूदा केंद्र सरकार ने वहां के लोगों को तमाम समस्याओं से निजात दिलाई है. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह पूरे समय सदन में मौजूद रहे और उन्होंने कई बार चर्चा में हस्तक्षेप भी किया.

विपक्ष की ओर से कांग्रेस के सदस्य विवेक तन्खा ने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार व उनके पलायन की घटनाओं की जांच के लिए आयोग गठित करने की मांग की. साथ ही विस्थापित कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों के लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मनोनयन का प्रावधान करने का सुझाव दिया.

तन्खा ने जब जांच के लिए आयोग की मांग की तो गृह मंत्री अमित शाह ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्हें पांच मिनट का समय और दिया जाना चाहिए. क्योंकि, वह कांग्रेस की तरफ से जांच की मांग कर रहे हैं. विवेक तन्खा ने कहा, जम्मू-कश्मीर हमारा था, हमारा है और हमारा ही रहेगा. आज उच्चतम न्यायालय ने जो निर्णय दिया है, वह जम्मू-कश्मीर के लोगों की जीत है.

अब्दुल्ला के बयान पर हंगामा

चर्चा के दौरान द्रमुक सांसद एम. अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर टिप्पणी की. इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने उन्हें रोका. इसके बाद कुछ देर तक सदन में हंगामा हुआ. फिर सभापति ने एम. अब्दुल्ला से अपनी बात पूरी करने को कहा. अब्दुल्ला ने अपने भाषण में पेरियार के बयान का जिक्र किया.

शाह ने पूछा किसका एजेंडा

इस बीच अमित शाह ने कहा कि तिरुचि शिवा द्रमुक का एजेंडा बता रहे हैं या यह विपक्षी गठबंधन का एजेंडा है. उन्हें यह बात स्पष्ट करनी चाहिए. बाद में सांसद मनोज झा के भाषण के बीच हस्तक्षेप करते हुए शाह ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक और द्वारिका से लेकर पूर्वोत्तर तक हर नागरिक जम्मू-कश्मीर के साथ खड़ा है.