छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का नाम लगभग फाइनल

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छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री चुनने के लिए बीजेपी ने 3 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है. तीनों ऑब्जर्वर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, सर्वानंद सोनोवाल और पार्टी महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम कल तक रायपुर पहुंचेंगे. इसके बाद प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और नितिन नबीन के साथ विधायकों से रायशुमारी करेंगे. शनिवार या रविवार को विधायक दल की बैठक में सीएम के नाम का ऐलान भी किया जा सकता है.

पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के साथ ही चर्चा है कि छत्तीसगढ़ का भावी सीएम आदिवासी नहीं बल्कि सामान्य या ओबीसी वर्ग से हो सकता है. इसी के साथ आदिवासी सीएम की दावेदारी खत्म मानी जा रही है. कहा जा रहा है कि तीनों पर्यवेक्षक राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से फाइनल नाम लेकर आएंगे. रायपुर में विधायकों से राय मशवरा करेंगे और नाम का ऐलान कर देंगे.

बीजेपी में कौन तय करता है मुख्यमंत्री

बीजेपी में विधायक दल तय करता है कि कौन मुख्‍यमंत्री बनेगा. इस हिसाब से पर्यवेक्षकों का काम ये है कि वो यहां विधायकों के साथ मीटिंग करेंगे. इस दौरान सीएम पद के लिए जो भी नाम आएगा उस पर विधायकों की राय लेंगे. जिसके पक्ष में ज्‍यादा विधायक होंगे उसका नाम मुख्‍यमंत्री के लिए ऐलान कर दिया जाएगा.

खास बात ये है कि इसमें राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व की भूमिका कहीं नहीं है. पर्यवेक्षकों की भी भूमिका केवल विधायकों से राय लेने की है. इस प्रक्रिया में राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व पर नाम थोपने का आरोप नहीं लगता.

विधायक दल की बैठक में रखा जाएगा नाम

दिल्‍ली से आ रहे पर्यवेक्षक अपने साथ राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व की तरफ से फाइनल नाम लेकर आएंगे. यहां विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें पर्यवेक्षक बताएंगे कि, राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व ने किसे मुख्‍यमंत्री बनाने का फैसला किया है. इसके बाद नाम सार्वजनिक कर दिया जाएगा.पर्यवेक्षकों की नियुक्ति में ही आदिवासी सीएम की दावेदारी खत्‍म होने का जवाब भी है.

जानकारों की मानें तो पर्यवेक्षक दल का नेतृत्‍व आदिवासी नेता को सौंपा गया है. ऐसे में अगर किसी गैर आदिवासी को मुख्‍यमंत्री बनाया जाता है तो जनता में यही संदेश जाएगा कि प्रदेश के सभी विधायकों ने मिलकर नाम तय किया है. आदिवासी पर्यवेक्षक ने ही गैर आदिवासी मुख्‍यमंत्री के नाम की घोषणा की है.

बीजेपी की राजनीति को करीब से समझने वाले राजनीतिक पंडित भी मान रहे हैं कि पार्टी छत्‍तीसगढ़ में आदिवासी मुख्‍यमंत्री बनाने के मूड में नहीं है. पार्टीपहले ही एक आदिवासी को राष्‍ट्रपति का पद देकर खुद को आदिवासी हितैषी साबित कर चुकी है.