कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी को वायनाड छोड़ने की नसीहत

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राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में करारी हार के बाद हिंदी बेल्ट में कांग्रेस के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं. इतना ही नहीं विपक्षी गठबंधन INDIA के नेता सासंद राहुल गांधी को वायनाड के बजाए उत्तर भारत से लड़ने की सलाह देने लगे हैं. साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में राहुल को कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से हार का सामना करना पड़ा था.

INDIA गठबंधन में शामिल सीपीएम के वरिष्ठ नेता एमवी गोविंदन ने कांग्रेस के केरल में लड़ने के फैसले पर सवाल उठाए. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीपीएम नेता का कहना है कि कोई भी कॉमन सेंस वाला व्यक्ति समझ जाएगा कि राहुल को अगले चुनाव में वायनाड से नहीं लड़ना चाहिए. राहुल ने 2019 चुनाव में वायनाड सीट से बड़ी जीत हासिल की थी.

गोविंदन ने कहा, ‘केरल में कोई भाजपा नहीं है. राहुल को भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहिए, LDF के खिलाफ नहीं. अगर कांग्रेस नेता एलडीएफ के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, तो यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी नहीं, बल्कि वाम दल हैं. राहुल को बीजेपी के गढ़ों में जाकर चुनाव लड़ना चाहिए.’

केरल में बगैर समर्थन कांग्रेस कुछ नहीं: सीपीएम

गोविंदन का कहना है कि बगैर मुस्लिम लीग के समर्थन के कांग्रेस अस्तित्व में ही नहीं रहती. उन्होंने कहा, ‘लीग के समर्थन के क्या राहुल वायनाड से चुनाव लड़ सकते थे? केरल में INDIA मोर्चे में शामिल सीपीआई के खिलाफ लड़ रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में नहीं जीत सकती. कांग्रेस का हिंदी राज्यों में प्रभाव नहीं है. चुनाव के नतीजों ने यह साबित कर दिया है. कांग्रेस ऐसी स्थित में आ गई है कि वह INDIA फ्रंट की अगुवाई भी नहीं कर सकती.’

कांग्रेस पर मढ़ दिए आरोप

उन्होंने राजस्थान की सीटों पर सीपीएम की हार का ठीकरा भी कांग्रेस पर फोड़ दिया. उन्होंने कहा, ‘अब तो कांग्रेस INDIA फ्रंट में भी एकता बनाने में असफल रही है. राजस्थान में कांग्रेस ही थी, जिसने भद्र विधानसभा क्षेत्र में सीपीएम की जीत की संभावनाओं पर पानी फेर दिया.’

क्या रहे नतीजे

भारत निर्वाचन आयोग यानी ECI ने रविवार को चुनाव परिणामों का ऐलान कर दिया था. 199 सीटों पर राजस्थान में चुनाव हुए और भाजपा ने 115 सीटें हासिल की. जबकि, कांग्रेस को महज 69 सीटें ही मिली. एमपी में 230 में से कांग्रेस सिर्फ 66 सीटें ही ले सकी. यहां भाजपा 163 सीटों पर विजयी हुई. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 35 सीटें जीती और भाजपा के खाते में 54 सीटें आईं.