अब एआई से ठगी, इस तकनीक को ऐसे समझें, उपाय और बचाव भी जानें

परिजन-दोस्तों के हूबहू आवाज से फोन कर ठग बना रहे शिकार, CG पुलिस का अलर्ट

RAIPUR. Now cheat with AI, understand this technique like this, know the remedies and preventions. छत्तीसगढ़ समेत देशभर में अब ऑनलाइन ठगी का तरीका भी एडवांस हो गया है। अब ठगों ने बेहद एडवांस तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर बैंक खातों में सेंध लगा रहे हैं। दअसल, एआई की डीपफेक तकनीक से ठग जिसे टारगेट करते हैं, उसके करीबी रिश्तेदार या परिचित की आवाज का सैंपल चुराकर हुबहू उसी आवाज में टारगेट को कॉल कर इमरजेंसी बताकर मांगते हैं या मोबाइल में ओटीपी भेजकर नंबर मांगते हैं। ओटीपी नंबर देते ही ठग खातों में सेंध लगाते हैं।

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देश के कई बड़े शहरों में इस तकनीक से ठगी की लगातार वारदातों को देखते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस ने अलर्ट जारी किया है। छत्तीसगढ़ में हो रही ऐसी ठगी के बीच साइबर सेल के अफसरों ने लोगों से अपील की है कि किसी के पास अनजान या नए नंबर से रिश्तेदार व परिचित के नाम से भी कॉल आए तो अलर्ट रहें। अगर वे मदद मांगते हैं तो उनकी पहले बात सुन ले।ं फिर जिस रिश्तेदार का कॉल आया हो उसके मोबाइल नंबर पर कॉल करें। फोन पर खुद बातें कर क्रॉस चेक करें। यानी अनजान नंबर से परिचित का भी कॉल आने पर तुरंत ही पैसा जमा न करें। छोटी सी सावधानी से साइबर ठगी से बच सकते हैं।

क्या है एआई और डीपफेक

साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक तरह से बनावटी (कृत्रिम) तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता। इस तकनीक से कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है। इसे मानव मस्तिष्क की तरह ही ऑपरेट किया जाता है। इसमें डीपफेक तकनीक होती है। इसमें किसी की आवाज, फोटो या वीडियो का सैंपल लेकर उसकी क्लोनिंग कर हूबाहू बनाया जाता है। वीडियो कॉल में चेहरा और वाइस कॉल में आवाज इतनी हुबहू रहती है कि फर्क करना मुश्किल होता है।

वाइस क्लोनिंग से धोखेबाजी

साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू के अनुसार ठग पहले टारगेटेड व्यक्ति खोजकर उसका नंबर और रिश्तेदार-परिचित की जानकारी निकाली जाती है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यम से परिचित की आवाज कॉपी करते हैं। फिर एअाई के जरिए ठग स्पीच बनाता है। डीपफेक तकनीक से अपनी स्पीच को परिचित की आवाज में बदल देता है। फिर उसी आवाज से टारगेटेड व्यक्ति को कॉल करते हैं। उन्हें मेडिकल, एक्सीडेंट जैसी इमरजेंसी बताते हैं, या ओटीपी पूछते हैं और शिकार बनाते हैं।

वीडियो कॉल से ठगी

एक्सपर्ट के अनुसार करीब 80 फीसदी लोग आवाज के झांसे में आकर तुरंत खाते में पैसे डाल रहे हैं। जो संबंधित परिचित को कॉल कर कंफर्म कर रहे हैं, वही ठगी से बच रहे हैं। डीपफेक में फोटो से वीडियो बनाया का विकल्प है। इसमें ठग झांसा देने के लिए एक स्पीच तैयार करता हैं। टारगेट व्यक्ति के परिचित की फोटो से वीडियो बनाता है। उसके बाद टारगेट व्यक्ति को फोन करता है। यह असली वीडियो कॉल की रहता होता है। इसमें ठग की जगह परिचित व्यक्ति का चेहरा दिखाई देता है।

ऐसे बच सकते हैं इस तरह की ठगी से

  • अनजान नंबर से कॉल आए तो कॉलिंग एप से जानकारी लें।
  • नंबर दूसरे के नाम पर है या अनजान हो तो कॉल न उठाएं।
  • उस नंबर से 2-3 बार कॉल आए तो एक बार बात कर लेें।
  • अगर रिश्तेदार व परिचित के नाम से कॉल हैं तो बात करें।
  • जो परिचित मदद मांग रहा है, उसके नंबर पर सीधे काॅल करें।
  • यदि अंजान नंबर से कोई लिंक आए तो उस पर क्लिक ना करें।

 

 

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